उत्तराखंड: मां ने किया गुनाह,जेल में कट रही मासूम बच्चों की जिंदगी….पढ़े पूरी खबर

childrens in jail

गुनाह किया है मां ने और उसकी सजा, उसके साथ-साथ मासूम बच्चे भी भुगत रहे हैं। नन्हे मासूमों को पता तक नहीं कि वो और उनकी मां ऊंची-ऊंची चहारदीवारी के भीतर बंद क्यों हैं? मामला देहरादून की सुद्धोवाला जेल का है। महज तीन से छह साल की उम्र के इन बच्चों को यह भी नहीं पता है कि आखिर वो यहां हैं तो क्यों?

दुखद बात यह भी है कि इन बच्चों को आम बच्चों की तरह शिक्षा का मौका भी नहीं मिल रहा। अब जेल प्रशासन ने पहल करते हुए शिक्षा विभाग से इनके लिए शिक्षा का अधिकार ऐक्ट के तहत शिक्षा की व्यवस्था करने का अनुरोध किया है। हालांकि शिक्षा विभाग इस पर अभी कोई फैसला नहीं ले पाया है

यह है मामला: जुलाई 2021 में सुद्धोवाला जेल के वरिष्ठ अधीक्षक ने दून के सीईओ डॉ. मुकुल कुमार सती को मामले की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि जेल में सजा काट रही तीन महिला कैदियों के तीन मासूम बच्चे भी उनके साथ ही रह रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, बच्चों की आयु तीन से छह साल के बीच है। जेल में बंद होने से उन्हें आम बच्चों के समान जीने का मौका नहीं मिल रहा है।

आरटीई ऐक्ट में हर बच्चे को प्रारंभिक शिक्षा देने का प्रावधान है। कुछ समय पहले राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग भी ऐसे बच्चों के हित में विशेष दिशानिर्देश दिए थे। बचपन को बचाने की सरकार की तमाम योजनाएं इतनी मजबूत नहीं लग रहीं कि वो जेल की चहारदीवारी के भीतर आ सकें।

जेल प्रशासन से मुझे यह पत्र मिला है। आरटीई ऐक्ट में छह साल से 14 साल के बच्चे आते हैं। छोटे बच्चों के लिए महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग, आंगनबाड़ी की व्यवस्था करता है। बहरहाल इस मामले में डीईओ बेसिक को कार्रवाई के निर्देश दे दिए गए हैं। समाधान निकालने का प्रयास  किया जा रहा है। 
डॉ. मुकुल कुमार सती, सीईओ, देहरादून