Dehradun : कंपनी दर कंपनी ट्रांसफर की जाती थी ठगी की रकम

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स्टार्ट अप के नाम पर रकम दोगुनी करने का झांसा देने वाले साइबर ठग कई कंपनियों का इस्तेमाल करते थे। ये कंपनियां फर्जी नहीं, बल्कि वास्तव में रजिस्टर्ड कराई जाती थीं। कंपनी भले भारत में खोली गई हो, लेकिन उसका पूरा वित्तीय व अन्य नियंत्रण विदेश में बैठे ठगों के पास होता था। जब वे अपने जाल में किसी को फांस लेते थे और रकम ट्रांसफर करा लेते थे तो उस रकम को एक के बाद एक अलग-अलग कंपनियों में भेज देते थे। चूंकि, कंपनी रजिस्टर्ड हैं तो यह जांच एजेंसियों की नजरों से भी बच जाती थीं।

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि कुछ माह पहले इस तरह की ठगी लोन एप के जरिये की जाती थी, लेकिन बेंगलुरू व दिल्ली में कई आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद साइबर ठगों ने रकम निवेश कर दोगुनी करने का झांसा देकर ठगी शुरू की। ठगों ने चीन के स्टार्ट अप में निवेश करने के बहाने कई कंपनियों को रजिस्ट्रार आफिस में कुछ खास एजेंटों के जरिये रजिस्टर्ड कराया। शिकार को जाल में फांसने के लिए शुरू में रकम दोगुनी कर दी जाती थी, लेकिन इसके बाद जैसे ही संबंधित व्यक्ति ज्यादा निवेश करता, उसकी रकम ठग ली जाती। ठगों की ओर से एजेंट को मोटा कमीशन दिया जाता था। जिसके कारण एजेंट इंटरनेट मीडिया व अन्य माध्यमों से आमजन को अपने जाल में फंसाते थे।

सवा सौ करोड़ रुपये तक आए खाते में

करीब 250 करोड़ की ठगी में गिरफ्तार पवन पांडेय का पेटीएम खाता इसलिए भी जांच दायरे में आया, क्योंकि उसके खाते में एक या दो करोड़ नहीं, बल्कि सवा सौ करोड़ रुपये तक ट्रांसफर किए गए थे। एसएसपी अजय सिंह के मुताबिक, पवन के खाते में दो बार बड़ी रकम आई। एक बार 90 लाख रुपये आए, लेकिन दस मिनट के भीतर ही ये दूसरे खातों में ट्रांसफर कर क्रिप्टो करेंसी में बदल दिए गए।

20 शिकायतें और मिलीं

पावर बैंक एप के जरिये हुई साइबर ठगी में एसटीएफ ने तीन मुकदमे दर्ज किए हैं। एसएसपी ने बताया कि उन्हें बीस शिकायतें और मिली हैं। इनका अध्ययन चल रहा है। एसएसपी ने बताया कि इसी मामले में छह आरोपित मंगलवार को बेंगलुरू में भी पकड़े गए हैं। एक आरोपित को बेंगलुरू पुलिस ने विदेश भागते समय एयरपोर्ट से दबोचा। उत्तराखंड एसटीएफ आरोपितों की रिमांड लेने का प्रयास करेगी। उनसे पूछताछ के लिए टीम बेंगलुरू भी जाएगी।

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