उत्तराखंड के जंगल में लगी आग 37 हेक्टेयर जंगल खतरे मे

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उत्तराखंड में 37.83 लाख हेक्टेयर जंगल को आग का खतरा है। इसमें भी 11.28 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र हाई रिस्क जोन में है, जबकि शेष हिस्सा मीडियम और लो रिस्क जोन में। फायर सीजन के दृष्टिगत किए गए अध्ययन में यह बात सामने आई है। गर्मियों में जंगलों को आग से बचाने की बड़ी चुनौती है। हालांकि, वन विभाग का kehna है कि संवेदनशील क्षेत्रों के हिसाब से ही जंगलों को आग से बचाने की रणनीति बनाई गई है।

उत्तराखंड में मौसम भले ही अभी साथ दे रहा, मगर फायर सीजन की उल्टी गिनती से वन महकमे की चिंता बढऩे लगी है। वजह ये कि हर साल ही फायर सीजन (15 फरवरी से मानसून आने तक की अवधि) में बड़े पैमाने पर वन संपदा आग की भेंट चढ़ जाती है। फायर सीजन से निबटने के मद्देनजर विभाग ने अध्ययन कराया तो बात सामने आई कि राज्य के कुल भूभाग 53.48 लाख हेक्टेयर में से 37.83 लाख हेक्टेयर क्षेत्र जंगलों की आग के लिहाज से संवेदनशील है।

अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार प्रदेशभर में 11.28 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र हाई रिस्क जोन में है। 15.41 लाख हेक्टेयर मीडियम और 11.14 लाख हेक्टेयर लो रिस्क जोन के अंतर्गत है। ऐसे में इन वन क्षेत्रों को फायर सीजन यानी गर्मियों में आग से बचाने की सबसे बड़ी samasiya है। मुख्य वन संरक्षक एवं नोडल अधिकारी (वनाग्नि) वीके गांगटे भी इससे इत्तेफाक रखते हैं।

हालांकि, गांगटे बताते हैं कि फायर सीजन में जंगलों को आग से बचाने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों के हिसाब से ही रणनीति तैयार की गई है। हाई, मीडियम व लो रिस्क जोन वाले क्षेत्रों में इनकी संवेदनशीलता के हिसाब से कार्मिकों की तैनाती की जाएगी। साथ ही फायर वाचर व दैनिक श्रमिक भी तैनात किए जाएंगे। इसके अलावा वन पंचायतों और स्थानीय ग्रामीणों की मदद भी ली जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति से निबटने के लिए विभाग की तैयारियां पूरी है।

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