उत्तराखंड: सात दिन में होनी थी जांच-सौ दिन में पूरी न कर पाए अफसर,जानें क्या है मामला

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जिला प्रशासन देहरादून के तीन अफसरों को जिस जांच को एक सप्ताह में पूरा करना था, वह 100 दिन में भी पूरी नहीं हो पाई। यह लापरवाही बताने के लिए काफी है कि आम जनता की समस्याओं पर दिए जाने वाले निर्देशों को मातहत कितनी संजीदगी से निपटाते होंगे, जब विभागीय ट्रांसफर पर डीएम की ओर से बिठाई गई जांच इतनी लंबी अवधि के बावजूद भी पूरी नहीं हो पाई। जांच को दूसरी जांच टीम बनाए हुए भी डेढ़ माह हो गए हैं।

दरअसल, जिले में बीते 12 अगस्त को 11 कर्मचारियों का ट्रांसफर किया गया था। तत्कालीन अपर जिलाधिकारी प्रशासन की तरफ से लिस्ट जारी होते ही इस पर सवाल उठने लगे। आरोप लगा कि निचले ग्रेड-पे वाले कर्मचारियों को उच्च ग्रेड पे वाले पदों पर तैनाती दी गई। शिकायत डीएम डॉ. आर राजेश कुमार के पास पहुंची।  उन्होंने इस ट्रांसफर की जांच बिठा दी।
तत्कालीन एडीएम वित्त एवं प्रोटोकॉल गिरीश गुणवंत, एसएलएओ अवधेश कुमार, अपर नगर मजिस्ट्रेट प्रेमलाल को जांच देते हुए सात दिन में रिपोर्ट मांगी गई। तीनों ही अफसर एक सप्ताह में जांच पूरी नहीं कर पाए। इसके बाद तीनों का जिले से ट्रांसफर हो गया। जांच पूरी नहीं होने पर डीएम ने 29 सितंबर को फिर नई कमेटी बनाई। इसमें एडीएम प्रशासन डॉ. एसके बरनवाल, मुख्य कोषाधिकारी रोमिल चौधरी और एसएलएओ शैलेंद्र सिंह नेगी को शामिल किया गया।

इस जांच कमेटी को गठित हुए भी लंबा समय बीत गया। आलम यह है कि जिस जांच को सात दिन में पूरा होना चाहिए था, वह 100 दिन बाद भी अधूरी है। जिस ट्रांसफर लिस्ट पर जांच बैठी, उसमें शामिल कर्मचारी नए तैनाती आदेश पर ड्यूटी भी कर रहे हैं। अगर जांच में किसी कर्मचारी की नियुक्ति सही नहीं पाई जाती तो इतने लंबे समय तक हुई लापरवाही का जिम्मेदार कौन होगा?