दिल्ली-देहरादून शताब्दी में आग की घटना से रेल मंत्रालय ने दिए यहाँ निर्देश

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नई दिल्‍ली-देहरादून शताब्‍दी में पिछले दिनों आग की घटना से सबक लेते हुए रेलवे मंत्रालय ने सभी जोनों को निर्देश दिए हैं कि ट्रेन में चलने वाले स्‍टाफ को आग फैलने से रोकने और फायर फाइटिंग उपकरण चलाने की ट्रेनिंग दी जाए. जिससे इस तरह की घटना हो शुरू होने के साथ रोका जा सके, इससे नुकसान कम होने की संभावना रहेगी.

रेलवे मंत्रालय के कार्यकारी निदेशक सेफ्टी ने सभी जोनों को निर्देश दिए हैं कि ट्रेनों में आग की घटनाओं को रोकने के लिए  15 दिन का आग को रोकने के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू तत्‍काल शुरू किया जाए. इस ट्रेनिंग प्रोग्राम के तहत पेंट्री कार में चलने और कांट्रैक्‍टर के कर्मचारियों को आग को फैलने से रोकने के तरीके सिखाए जाएं, साथ ही फायरफाइटिंग उपकरण चलाने की भी ट्रेनिंग दी जाए. ट्रेनिंग के दौरान यह बताया जाए कि इस तरह की घटना होने के बाद तत्‍काल क्‍या एक्‍शन लेना चाहिए और क्‍या सतर्कता बरतनी चाहिए. रेलवे मंत्रालय ने 10 अप्रैल तक सभी जोन से ट्रेनिंग संबंधी रिपोर्ट मांगी है.

मंत्रालय द्वारा दिए गए निर्देश के अनुसार कोच, पावर कार और पेंट्री कार में लगातार जांच होनी चाहिए कि वहां पर कोई तार लटका नहीं है, तार किसी भी प्‍वाइंट से लूज नहीं है. फ्यूज आदि  की भी जांच करनी चाहिए। शौचालय की जांच करनी चाहिए कि वहां पर किसी भी तरह का गैप या दरार न हो, जिससे पैसेंजर वहां पर टिशू पेपर आदि  रख सके. नो स्‍मोकिंग के साइन कोच और शौचालय में ठीक से लगे होने चाहिए । स्‍मॉक और आग सूचना देने वाले उपकरण और अलार्म प्रॉपर काम कर रहे  हैं, इसकी भी नियमित जांच होनी चाहिए। चलती ट्रेन में लगातार जांच होनी चाहिए कि कोई पैसेंजर गैस  सिलेंडर, पटाखे या अन्‍य ज्‍वलनशील पदार्थ लेकर सफर न कर रहा हो. इंजन और  जनरेट कार में आयल, फ्यूल, कॉटन या डस्‍टर आदि नहीं रखना चाहिए।